💐स्वागतम्!💐

जो बीत चुका है उसे अर्थात् इतिहास को मिटाया नहीं जा सकता, परन्तु उसे विकृत कर हमारे सम्मुख प्रस्तुत तो अवश्य ही किया जा सकता है। शतांस ऐसा ही अन्याय हुआ है हम भारतीयों के साथ।

कितनी चतुराई से हमें कहीं बाहर से आये बर्बर आक्रांताओं के रूप में घोषित कर दिया गया, हमारे तथा मानव सभ्यता व संस्कृति के आदिस्रोत विश्व विरासत “वेदों” को असभ्य गड़ेरियों के गीतों के रूप में चित्रित किया गया!

इन सबके पीछे हमें अपमानित करने, हमारे पवित्र धर्म, सभ्यता और संस्कृति को समूल नष्ट करने, भारत में अंग्रेजी शासन को सुदृढ़ करने, सम्पूर्ण भारतीय भूखण्ड को ईसाइयत और इस्लाम में दीक्षित करने की षड्यंत्रपूर्ण मानसिकता थी!

परन्तु कहा है “फ़ानूस बनके जिसकी हिफाजत हवा करे, वह शम्मा क्या बुझे जिसे रोशन खुदा करे..!”

भला हो इस युग के विधायक आनंन्दकंद भगवत्कृपा महर्षि दयानन्द का जिन्होंने “यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारतः” का युग-उद्घोष करते हुए अपने प्रचंण्ड तेज से उस घनघोर तमिस्रा को छिन्न-भिन्न कर दिया।

छाया घनघोर

हमारा उद्देश्य उस गौरवमयी अतीत को

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One response to “💐स्वागतम्!💐

  1. इन्द्र अहल्या पर शोधपरक , रक्षात्मक लेख पढ़ा ।
    अत्यंत प्रशंसनीय***

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