रसूल का काफ़िर परिवार

by: भांडाफोडू

कुछ ढोंगी पाखंडी लोग पहले भी ऐसा दावा कर चुके हैं कि, उनके पास चमत्कारी शक्तियां हैं ,या वह किसी का अवतार हैं .और कुछ लोग यह भी दावा कर चुके है कि वह अल्लाह के नबी हैं .और जब भी ऐसे लोगों से उनके दावों को साबित करने के लिए सबूत माँगा जाता है , तो वह लोगों को विश्वास करने और ईमान लाने को कहते हैं .फिर भी ऐसे पाखंडियों की हकीकत जाने बिना अज्ञानी लोग इनके अनुयायी बन जाते हैं .मुहम्मद साहब भी एक ऐसे ही विख्यात व्यक्ति थे जो खुद को अल्लाह का रसूल बताते थे . और कुरान को अल्लाह की किताब बताते थे .और भले ही मुहम्मद साहब और उनके जिहादियों ने मार मार कर या लालच देकर , कई लोगों को मुसलमान बना दियाथा , लेकिन खुद उनके कबीले कुरैश के लोग उनकी बातों पर कभी विश्वास नहीं करते थे .क्योंकि मुहम्मद साहब उन लोगों के सामने ही पैदा और जवान हुए थे . और वह उनकी नस नस से वाकिफ थे .
कुरैश के लोग और मुहम्मद साहब के परिवार लोग उनके और उनकी गढ़ी हुई कुरान के बारे में जो कहते थे वह खुद कुरान में इस तरह दिया गया है . लोग मुहम्मद साहब को इन नामों से पुकारते थे , जैसे –

1-झूठा
“तुम्हारे कबीले के लोग तुम्हें झूठा बताते हैं ” सूरा -फातिर 35 :4
“यह लोग कहते हैं कि तुमने अल्लाह के नाम से झूठ बातें गढ़ रखी हैं ” सूरा -अश शूरा 42 :24
” तुम खुद ही अल्लाह के नाम से कुरान रचते हो “सूरा -सबा 34 :8
2-जालसाज
” कुरान तो बस पहले लोगों की कहानियाँ ही हैं “सूरा – नहल 16 :24
” आयतें तो तुम खुद ही बनाते रहते हो ” सूरा – नहल 16 :101
“यह तो एक शायर है जिसने खुद ही कुरान बना डाली है “सूरा -अल अम्बिया 21 :5
” यह तो केवल निराधार बातें है , जो तुम सवेरे शाम लोगों को सुनाते रहते हो “सूरा – अल फुरकान 25 :5
3-टोटके बाज
“लोग कहते हैं कि यह तो खुला पाखंडी और टोटके बाज है “सूरा -यूनुस 10 :2
“यह कहता है कि तुम लोग अपने पूर्वजों के देवताओं को छोड़ कर कल्पित अल्लाह की इबादत करो . और इसने खुद कुरान बना ली है “
सूरा -सबा 34 :43
” यह तो बड़ा पाखंडी है ,क्या इसने सभी देवताओं को मिला कर एक देवता बना लिया है “सूरा -साद 38 :4

4-पागल कवि
“क्या हम इस पागल कवि के कहने पर अपना धर्म छोड़ डालें “सूरा-अस साफात -37 :36
“यह तो एक उन्मादी कवि है .हम चाहते हैं कि इसकी दुर्घटना हो जाये “सूरा – अत तूर 52 :29

5-भूत ग्रस्त बावला
“तू झूठ कहता है कि कुरान तेरे ऊपर उतरी है ,अवश्य ही तू एक दीवाना है “सूरा -अल हिज्र 15 :6
” इसके ऊपर तो उन्माद का दौरा पड़ जाता है “सूरा -अल मोमिनून 23 :70
“यह तो पढ़ा लिखा व्यक्ति है , फिर भी बावला बनता है “सूरा -अद दुखान 44 :14
“हे मुहम्मद तुम आमने सामने बहस करो .तुरंत पता चल जायेगा कि तुम पागल हो “सूरा – सबा 34 :46
6-मुहम्मद का काफ़िर परिवार
कुरैश के लोगों की तरह मुहम्मद साहब के सभी चाचा (Uncles ) और चाचियों (Aunties )ने कभी मुहम्मद साहब को अल्लाह का रसूल नहीं माना .बल्कि एक पाखंडी , ढोंगी और झूठा ही मानते रहे .और न मुहम्मद साहब की झूठी कुरान को पढ़ा और न सुना .और घर के अधिकांश लोग कभी मुसलमान नहीं बने .और न कभी नमाज पढ़ी .एक बार मुहम्मद साहब के चाचा जिसने उनको पाला था ,यह कहा था ” मेरे भतीजे तुम इस्लाम के नाम पर जहन्नम की जो आग जला रहे हो वह क़यामत तक नहीं बुझेगी . और इस आग से सारी दुनिया खाक हो जाएगी “फिर भी मैं तुन्हें लोगों से बचाता रहूँगा . लेकिन मुसलमान नहीं बनूँगा . क्योंकि मुझे पता है की तुम पाखण्ड कर रहे हो .
.मुहम्मद साहब के दादा ( grand Father ) का नाम अब्द अल मुत्तलिब था .जिसके 8 बेटे थे . बड़ा लड़का अब्द अल इलाह यानि मुहम्मद साहब के पिता थे . जो मुहम्मद साहब के जन्म के कुछ दिन बाद ही मर गए थे .मुहम्मद साहबको उनके चाचा अबू तालिब ने पाला था .बाकि चाचाओं और चाचियों के नाम इस प्रकार हैं .
अ – मुसलमान चाचा -1 .हमजा 2 .अब्बास
ब- काफ़िर चाचा -1 .अबू तालिब 2 ,अबू लहब 3 ,जुबैर 4 .मकवान 5 .सफ़र 6 . हारिस
स -मुसलमान चाची-1 .सय्यदा साफिया
द- काफ़िर चाचियाँ -1 .उम्मे हकीम ( बैजा ) 2 .अरूही 3 .अतैका 4 .बर्रा 5 .अमीना
अर्थात चाचा के परिवार के 14 लोगों में से केवल 3 लोग मुसलमान बने थे .और मुहमद साहब के परिवार में केवल उनकी पत्नियां थीं जो मजबूरी के कारण मुसलमान बन गयी होंगी .
7-गैर अरब जिहादी
पश्चिम के इतिहासकारों ने इस्लाम को एक विश्व स्तरीय लूट अभियान बताया है . क्योंकि मुहम्मद साहब की जिहाद में अरब के बहार के लोग भी उसमे शामिल होने के लिए दूर दूर से मक्का मदीना पहुँच जाते थे .और मुहम्मद साहब उनको अपना साथी (Companion ) यानि सहाबा की पदवी दे देते थे .ऐसे कुछ मुख्य विदेशी सहाबियों के नाम इस प्रकार हैं
1 .बिलाल बिन रिबाह ( हफ्शी ) 2 .सलमान फारसी ( ईरानी ) 3 .सुहैब ( रोमन ) 4 .अब्दुल रशीद कैस खान (बलूची )ऐसे अनेकों लोग थे जो माले गनीमत के ,और औरतों के लालच में जिहाद में भाग लेते थे .
लेकिन अधिकांश मुसलमान नहीं जानते कि भारत के केरल से भी एक व्यक्ति ” चेरमान पेरुमाल Cherman Perumal ” भी मक्का गया था .और मुहमद के साथ जिहाद में भाग लेता था . मुहमद ने उसका नाम ” ताजुद्दीन ” रख दिया था .यह सन 629 कि बात है . उस समय अरब और केरल के बीच समुद्र मार्ग से व्यापर होता था . और “मालिक बिन दीनार ” नामक अरब चेरमन को मक्का ले गया था . और उसे मुहमद साहब से मिलवा दिया .और इसी गद्दार ने मुहम्मद साहब को भारत की धन सम्पति के बारे में जानकारी दी थी .जिस से अरबों में लालच पैदा हो गया .चूंकि मुहम्मद साहब की तरह जिहादी समुद्र से डरते थे .इसलिए चेरमान ने जमीनी रस्ते से हमला करने का सुझाव दिया था.चेरमान काफी समय तक आरब में रहा .और जब वह वापिस भारत आया तब तक मुहम्मद का देहांत हो गया था . तब मुहम्मद बिन कासिम ने सिंध पर हमला किया था .
इस लेख के माध्यम से यही बात साबित होती है कि इस्लाम तलवार के जोर से फैलाया गया था . और मुहम्मद साहब पाखंडी थे . उनके चाचा चची इसलिए मुसलमान नहीं बने क्योंकि वह मुहम्मद साहब से नहीं डरते थे .और उनकी आसलियत जानते थे .
नोट – यह लेख का पूर्वार्ध है , अगला भाग शीघ्र ही प्रकाशित होगा . कृपया प्रतीक्षा करिए .

http://www.answering-islam.org/Shamoun/mhd_amin2.htm

http://wiki.answers.com/Q/What_is_Prophet_Muhammad’_uncle’s_name

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