आखिर मुसलमान जाकिर नाइक से इतनी नफरत क्यों करते हैं?

By: Agniveer

This article is also available in English at http://agniveer.com/716/hate-zakir/

जाकिर भाई एम बी बी एस जो डॉ जाकिर नाइक के नाम से भी जाने जाते हैं, आज की तारीख में सबसे ज्यादा लानत पाने वाले शख्स हैं. यह लानत उन पर कोई और मजहब के लोग नहीं लेकिन खुद उनके मजहब इस्लाम के मानने वाले ही भेजते हैं. दुनिया के नामी और हिन्दुस्तान, पाकिस्तान में सबसे बड़े तालीमी इदारे (शैक्षिक संस्थान) दारुल उलूम देवबंद ने कुछ अरसा पहले जाकिर भाई के खिलाफ फतवा लगाया है. इसमें कोई शक नहीं कि जाकिर भाई पिछले कुछ साल में मजहबी बाजार में सबसे ज्यादा कीमत पाने वालों में से एक हैं. वे खुद को इस्लाम का खिदमतगार (सेवक) बताते हैं और दावा करते हैं कि वे नए लोगों तक इस्लाम को पहुंचाते हैं. खुद को अल्लाह और मुहम्मद का अदना खिदमतगार कहते हैं. खुद को इस्लाम और दीगर मजाहिब (दूसरे धर्मों) का आलिम (विद्वान) भी कहते हैं! पर फिर भी उन पर सबसे ज्यादा लानत भेजने वाले और नफरत करने वाले मुसलमान ही हैं. इस लेख में हम उन वजूहात (कारणों) की तहकीक करेंगे कि जिससे जाकिर भाई मुसलमान भाइयों की नजरों में पहले शख्स हैं जो जहन्नम में भेजे जायेंगे! अधिक जानने के लिए गूगल पर “we hate zakir naik” डालें और देखें.

यहाँ हमारे पढने वालों के लिए इस्लाम का थोड़ा राफ्ता (परिचय) कराना जरूरी है. अधिकतर लोग यह समझते हैं कि इस्लाम वह मजहब है जो कि मुहम्मद (सल्लo) ने फैलाया और जो कुरान में लिखा है. कुरान कहती है कि जो आदमी मुहम्मद (सल्लo) के कहे पर ईमान लाएगा वह जन्नत में जाएगा जहां उसे बहुत सी जवान लड़कियां (जिनके हुस्न और बदन की खूबियाँ हदीसों और दूसरी इस्लाम की पाक किताबों में मिलती हैं, मसलन उनका जिस्म शीशे की तरह आरपार दिखाई देने वाला, आँखें मोटी, छाती…. वगैरह वगैरह), बहुत से मोतियों के मानिंद लड़के जो जन्नत में शराब के प्याले लिए अपने मालिक की शान में सदा फिरते रहेंगे, शराब के दरया और पंछियों का गोश्त और भी बहुत कुछ. कुरान पर अमल करने की बात वैसे तो देखने में सीधी लगती है पर यह इतनी सीधी है नहीं. ऐसा इसलिए कि केवल यह कह देने से कि कुरान पर अमल करो, काम नहीं चलता. हर आलिम अपने तरीके से कुरान के मतलब निकालता है और यही वजह है कि कुरान एक मानने पर भी मुसलमानों में आज बहत्तर (७२) से भी ज्यादे फिरके (वर्ग) हैं. हरेक फिरका खुद को असली इस्लाम और दूसरों को दोजखी (नरकगामी) करार देता है. पैगम्बर मुहम्मद (सल्लo) की कुछ हदीस हैं जो अबू दाउद और तिरमिधि में मिलती हैं जो इस तरह है-

“अबू दाउद, किताब 40, हदीस 4579: नबी ने फरमाया कि यहूदी इकहत्तर या बहत्तर (७१ या ७२) फिरकों में बंट गए. ईसाई भी बहत्तर फिरकों में बंटे. मेरी उम्मत तिहत्तर (७३) फिरकों में बंटेगी. “

“तिहत्तर फिरकों में से केवल एक फिरका ही सच्चा है जो जन्नत में जाएगा, बाकी सब जहन्नम की आग में जलाए जायेंगे.” [तिरमिधि और अबू दाऊद]

तो मसला अब यह है कि मुहम्मद (सल्लo) की बात झूठी नहीं हो सकती और इसलिए इस्लाम में मौजूद आज तिहत्तर फिरकों में से बहत्तर तो काफिरों के साथ ही दोजख की आग में जलेंगे. तो यही वजह है कि इस्लाम के फिरके सुन्नी, शिया, वहाबी, सूफी, कादियानी और इसी तरह न जाने कितने ही फिरके अपने को सच्चा और बाकी ७२ को झूठा साबित करने मिल लगे रहते हैं. हालांकि कुछ फिरके काफिरों पर भी गम खाने वाले हैं और उन्हें भी जन्नत नसीब होने की ख्वाहिश करते हैं लेकिन ये बहुत थोड़े हैं. अधिकतर तो वे ही हैं जो काफिरों को अल्लाह और रसूल का दुश्मन समझ कर उन पर लानत भेजते हैं. वे केवल ऐसा कहते नहीं, लेकिन बमबारी करके जताते भी हैं. काफिर को तो छोड़ें, आज मुस्लिम दुनिया में अधिकतर जगहों पर जबरदस्त फिरकापरस्ती (सम्प्रदायवाद) है जैसे कि पाकिस्तान में आये दिन कभी कादियानियों की मस्जिद उड़ा दी जाती है तो कभी शिया नमाजियों को सरे आम भून दिया जाता है.

पर देखिये! फिरकों में बंटी और लगातार बंटती जा रही मुस्लिम उम्मत के इस हाल पर भी जाकिर भाई इस्लाम को “सबसे तेज फैलता हुआ मजहब” (fastest growing religion) करार देते हैं! वैसे उन्होंने आजतक यह नहीं बताया कि वह सच्चा फिरका कौन सा है जिसकी तरफ मुहम्मद (सल्लo) का इशारा था. खैर, इस्लाम में फिरकापरस्ती हमारे इस लेख का मौजू (विषय) नहीं. इस्लाम के ७३ फिरकों में सबसे इन्तेहापसंद (अतिवादी) और दहशतगर्द (आतंकवादी) फिरका वहाबी है.यह फिरका अपने वजूद में आने से (अट्ठारहवीं सदी) लेकर आज तक बड़े बड़े दहशतगर्दों जैसे ओसामा बिन लादेन, अल कायदा को पैदा करने के लिए जाना जाता है. इस्लाम के असली मायने “शांति=अमन” का अगर किसी फिरके ने सबसे ज्यादा मजाक बनाया है तो यह वहाबी ही है. जाकिर भाई का ताल्लुक इस फिरके से ही बताया जाता है. लेकिन यहीं पर बस नहीं है! जाकिर भाई वहाबी रिवायतों में कभी कभी ऐसे फिरकों की रिवायतों के तड़के भी लगा दिया करते हैं कि हांडी लजीज होने के बजाये कड़वी हो जाती है! अपनी इस नयी हांडी का नाम वे इस्लाम रखते हैं लेकिन असल में उनके इस खेल ने इस्लाम की धज्जियां उड़ा के रख दी हैं. और इस वजह से अब इस्लाम के सब बड़े बड़े फिरके उन पर फतवे दे चुके हैं. दारुल उलूम देवबंद, शिया, कादियानी सब के सब कह चुके हैं कि जाकिर नाइक को इस्लाम का दावा करने का हक़ ही नहीं है. यह सब कैसे हुआ, एक एक करके देखते हैं कि कैसे जाकिर भाई ने बड़ी चालाकी से अपने नाम के लिए इस्लाम का मजाक उड़ाया यहाँ तक कि पैगम्बर मुहम्मद (सल्लo) की सारी दुनिया में हंसी उडवाई.
१. जाकिर भाई एक कादियानी?

जाकिर भाई का दावा है कि वे इस्लाम और दीगर मजाहिब के आलिम हैं. अपनी वेबसाइट पर उन्होंने बहुत से लेख अपने नाम से इस्लाम और दुसरे मजहबों पर दे रखे हैं. पर असल में उन्होंने बहुत से लेख कादियानी/अहमदी किताबों से चुराए हैं. अब देखें कि इस बात ने पूरी मुस्लिम उम्मत को क्यों उनके खिलाफ कर दिया है-

– कादियानी/अहमदी बाकी सब इस्लाम के फिरकों के हिसाब से गैर मुस्लिम समझे जाते हैं क्योंकि इस फिरके को वजूद में लाने वाला शख्स मिर्ज़ा गुलाम अहमद खुद को नबी बताता था जबकि कुरान कहती है कि आखिरी नबी मुहम्मद (सल्लo) हैं.

– वहाबी फिरका अहमदियों का सबसे बड़ा दुश्मन है. यहाँ तक कि अधिकतर जगहों पर अहमदियों को संगसार (पत्थर मार मार कर मार डालने की सजा) करने में वहाबियों का नाम अक्सर सामने आता है.

– कादियानियों की किताब से जाकिर भाई ने जो बातें चुराई हैं और उन्हें अपने नाम से छापा है, वे बात असली इस्लाम से बिलकुल उलट हैं और यहाँ तक कि शिर्क तक भी जाती हैं. जैसे मुहम्मद (सल्लo) कल्कि अवतार थे. हिन्दुओं की जिस किताब “भविष्य पुराण” में कल्कि अवतार की जिक्र है वहां कहा गया है कि अल्लाह/भगवान खुद जमीन पर उतर कर इंसान की शक्ल में आएगा. कादियानी मौलाना ने इतना भी नहीं सोचा कि अल्लाह का इंसान बनकर जमीन पर उतरना उसकी शान में कितनी बड़ी गुस्ताखी है. लेकिन इससे बड़ी गुस्ताखी तो जाकिर भाई ने कर दी जिन्होंने हूबहू इस कादियानी मौलवी की किताब से कल्कि अवतार वाली बात चुराकर इस्लाम बताकर पेश कर दिया! जाकिर भाई बताएं कि इस्लाम के तहत क्या अल्लाह कभी इंसान बनकर जमीन पर आ सकता है? अगर नहीं तो कल्कि अवतार मुहम्मद (सल्लo) कैसे हो सकता है?

– भविष्य पुराण में लिखे जिस महामद नाम के आदमी को जाकिर भाई अपने कादियानी उस्ताद के इल्म की रोशनी में मुहम्मद (सल्लo) बता रहे हैं, दरअसल पुराण में उसको पिछले जन्म का भूत, राक्षस, धूर्त यानी शैतान की तरह नामुराद बताया गया है जिसे हिन्दुओं के भगवान शिव ने पीट पीट कर मार डाला था. (कैसे और भी बुरी तरह जाकिर भाई ने मुहम्मद साहब कि मजाक उड़ाई है, इस बारे में तफसील से जानने के लिए पढ़ें http://agniveer.com/479/prophet-puran/). इससे दो बातें साबित हो जाती हैं कि एक तो जाकिर भाई तनासुख (पुनर्जन्म) में यकीन करते हैं और दूसरा वो मुहम्मद (सल्लo) को पिछले जन्म का भूत, शैतान और बदमाश मानते हैं. इस सब के बाद भी क्या कोई सच्चा मुसलमान जाकिर भाई से मुहब्बत कर सकता है?

– जाकिर भाई कहते हैं कि वेदों में मुहम्मद (सल्लo) के आने की भविष्यवाणी है. यह बात भी उन्होंने क़दियानियों की किताब से हूबहू चुरा ली. इस दावे की पड़ताल यहाँ देखें. http://agniveer.com/hi/2932/muhammad-vedas-hi/. अब जब वेद की भविष्यवाणियों को जाकिर भाई कादियानियों की तरह ठीक मानते हैं तो वे खुद बाकी इस्लाम की मुखालफत करते हैं क्योंकि इस्लाम का और कोई फिरका वेदों को अल्लाह का कलाम नहीं मानता. मजेदार बात यह है कि अपने एक लेख में वेदों की भविष्यवाणियों पर यकीन करने वाले जाकिर भाई अपने दूसरे लेख में कहते हैं कि उन्हें पता नहीं कि वेद अल्लाह का कलाम हैं कि नहीं! अब सवाल उठता है कि अगर आपको यह पता नहीं है तो फिर वेद की भविष्यवाणियों पर आपने कैसे यकीन कर लिया?

इस सबसे साबित होता है कि जाकिर भाई का इस्लाम कुरान और हदीसों पर खड़ा न होकर कादियानी किताबों पर खड़ा है. लेकिन वे खुद को सच्चा मुसलमान कहते हैं और कादियानियों को बुरा भी कहते हैं क्योंकि इन्हें पैसे और साजो सामान तो वहाबी ही मुहैय्या कराते हैं! लगता ऐसा है कि जाकिर भाई वहाबी मुखौटे में एक कादियानी ही हैं और इसी लिए कादियानी बातों को फैलाने में वो इस कदर दीवाने हैं कि उन्हें इसके लिए शिर्क करने से भी गुरेज नहीं और न ही मुहम्मद (सल्लo) की बेइज्जती करने से.
२. यजीद के सदके- जाकिर भाई का यजीद प्रेम

पूरी मुस्लिम उम्मत के लिए एक ग़मगीन दिन, जब यजीद ने मुहम्मद (सल्लo) के पोते हुसैन को धोखे से कर्बला में घेर कर प्यासा मार डाला. जो यजीद अधिकतर तारीखदान की नजरों में शराबी, बच्चों से बुरा काम करने वाला, और कुत्ते पालने वाला था, इस तरह की इस्लाम में हराम हरकतें करने वाला था उस यजीद को जाकिर भाई ठीक समझते हैं. जिस यजीद के राज में पाक मक्का और मदीना शहरों की बेइज्जती की गयी और वे तबाहो बर्बाद कर दिए गए, उस यजीद को जाकिर भाई बुरा नहीं समझते! सवाल पैदा होता है की अगर यजीद नेक इंसान था तो फिर ऐसी नेकी तो काफिर भी करते हैं!
३. जाकिर भाई और हलाल गोश्त

जाकिर भाई एम बी बी एस गोश्त खाने को सही ठहराते हैं. वे यह तो तस्लीम करते हैं की कोई मुसलमान बिना गोश्त भी मुसलमान रह सकता है लेकिन वे हलाल गोश्त खाने के पीछे यह मन्तक देते हैं

१. पेड़ पौधे भी काटने पर रोते हैं जैसे जानवर. इस बात में वे किसी मुल्क के एक किसान के किये हुए एक नुस्खे का हवाला देते हैं! उनका कहना है कि इस किसान ने वो मशीन बनायी है जिससे पेड़ की रोने की आवाज सुनाई देती है!

२. जानवर को हलाल करते वक़्त सबसे कम दर्द होता है! क्योंकि हलाल करने में उसकी गले की नस पहले फाड़ी जाती है जो खून को दिमाग तक ले जाती है और थोड़ी ही देर में वो बेहोश हो जाता है!

३. इस्लाम में केवल वही जानवर खाए जाते हैं जो गोश्त नहीं खाते. क्योंकि इस्लाम मानता है कि जैसा खाना होगा वैसा ही दिमाग. अगर चीर फाड़ करने वाले जानवरों का गोश्त खाया जाए तो दिमाग वैसा ही चीर फाड़ करने वाला होगा. इसलिए मुसलमान केवल अमनपसंद जानवरों का ही गोश्त खाते हैं ताकि वो भी अमन पसंद रहें!

आज के पढ़े लिखे बहुत से तरक्कीकार मुसलमान इन सब घटिया मन्तकों पर आंसू बहाते हैं जो पूरी दुनिया में इस्लाम की एक मजाक बना रहे हैं. वो पूछते हैं कि अगर किसान मशीन बना रहा था तो सब साइंसदान और दानिशवर उसके खेत में मूली उगा रहे होंगे! और उस किसान का नाम पता क्या है? यह रोने की आवाज कभी टेलीविजन पर क्यों नहीं किसी ने सुनी? क्या मीडिया को इस किसान का पता नहीं है? इसी तरह अगर गले की नस फाड़ने से जानवर को दर्द नहीं होता तो एक दम झटके से जानवर को जिबा करने से भी तो गले की नस फटेगी ही और हलाल के बनिस्पत और भी तेज कटेगी फिर भी झटका में दर्द कम होगा! इसी तरह अगर अमनपसंद जानवर को खाकर कोई अमनपसंद ही रहता है तो दरिन्दे मांसखोर जानवर जैसे शेर चीते वगैरह भी तो अमनपसंद जानवरों को ही मारते हैं, फिर वो अमनपसंद क्यों नहीं बने रहते? इस तरह पढ़े लिखे मुसलमान अब गोश्त से दूर हो रहे हैं और इसी के नतीजे में आज की तारीख में गोश्त के खिलाफ लामबंद होने वाले सबसे बड़ी जमातों में एक इस्लाम वेज डोट कॉम है जिसमें हजारों मुसलमान जी जान से लगे हैं. इन्होने जाकिर नाइक को अपनी बेवकूफी से इस्लाम को बदनाम करने के लिए जम कर लताड़ लगाई है. आप इसे यहाँ पर देख सकते हैं http://www.islamveg.com/halalmeat.asp
४. जाकिर भाई ओसामा बिन लादेन के लिए!

जाकिर भाई ओसामा बिन लादेन के बड़े हमदर्द हैं. किसी ने उनसे पूछा कि वे ओसामा के बारे में क्या सोचते हैं तो उन्होंने कहा- “अगर ओसामा ने सबसे बड़े दहशतगर्द अमेरिका को खौफजदा किया है तो में उसके साथ हूँ”. आगे कहते हैं कि असल में क्या हुआ वह उनको नहीं पता! कोई जाकिर भाई से पूछे कि अगर असल में कुछ पता ही नहीं था तो अमेरिका को दहशतगर्द क्यों कहा? और अगर कहना था तो फिर यह भी कहते कि अगर ओसामा असलियत में दहशतगर्द है तो मैं उसके खिलाफ हूँ! ऐसा तो कुछ जाकिर भाई ने नहीं कहा. फिर वो विडियो जिनमें ओसामा बिन लादेन ने खुलेआम भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, इसराइल वगैरह को धमकी दी थीं और वो इस्लामी चैनल अल जजीरा पर ही आयीं थीं उनके बारे में जाकिर भाई क्यों भूले? चलो अमेरिका तो दहशतगर्द ठहरा सो ठहरा, भारत (जो कि जाकिर भाई का अपना मुल्क है) को धमकाने वाले के खिलाफ जाकिर भाई कुछ क्यों नहीं बोले? इस वजह से भी बहुत से वतनपरस्त मुसलमान उनसे नाराज हैं. देवबंद ने इस बात पर जाकिर भाई के खिलाफ फतवा भी जारी किया जिसे आप यहाँ पढ़ सकते हैं-http://sunninews.wordpress.com/2008/05/10/deobandi-fatwa-against-zakir-naikalso-denying-fatawa-against-cow-slaughter/
साफ़ है कि जाकिर भाई के दिल में ओसामा के लिए हमदर्दी इसीलिए है कि जाकिर भाई और ओसामा के हमदर्द एक ही हैं और वे ही दोनों को इस्लाम फैलाने के लिए चन्दा देते हैं. ओसामा बम फोड़कर काम करता है और जाकिर भाई उसके हमदर्द बनकर!
५. जाकिर भाई जेंटलमेन

जाकिर भाई ऊपर से दिखाते हैं कि वे सुन्नत (मुहम्मद सल्लo की आदतें और रहन सहन के तौर तरीके) का बड़ा ख्याल करते हैं लेकिन असल में वे हमेशा गैर इस्लामी लिबास पहनते हैं. हदीसों में आया है कि जो भी मुसलमान काफिरों से लिबास पहनता है, आखिरत के दिन गैर मुस्लिमों का सा सुलूक पायेगा. इसलिए सुन्नत में यकीन करने वाले सब मोमिन जाकिर भाई पर इस बात के लिए लानत भेजते हैं कि वो काफिरों जैसे पैंट, शर्ट, कोट, टाई वगैरह पहनकर गलत मिसाल पेश कर रहे हैं. उन्हें शायद लगता है कि यह पहनकर वे जेंटलमेन कहलाये जायेंगे लेकिन इस्लाम में यह जायज नहीं है.
६. मजार पर मन्नत माँगना गैर इस्लामी- जाकिर भाई

वहाबियों ने बहुत से सूफी दरगाहों और यहाँ तक कि मुहम्मद (सल्लo) की मजार भी जमीन में मिला दी क्योंकि उनकी नजर में यह शिर्क है. मजारें और दरगाह तोड़ने की अपनी इस तहरीक में उन्होंने बहुत से मर्दों, औरतों और बच्चों को जिबा किया. अकेले कर्बला में सन १८०२ में घरों और बाजारों में घुसकर अधिकतर लोगों को मार डाला. जाकिर भाई भी मन्नत मांगने को शिर्क कहते हैं और इसको गैर इस्लामी करार देते हैं. इस वजह से मन्नत मांगने वाले मुसलमान और सूफी सोच के लोग उनसे नफरत करते हैं.

अब ज़रा नजर डालें मुल्क के बड़े बड़े उलेमाओं पर कि जिन्होंने जाकिर भाई के खिलाफ फतवे देकर यहाँ तक कह दिया है कि उनकी तकरीरें गुमराह करने वाली हैं और वे हराम हैं और जो कोई भी उन्हें सुनकर अमल करेगा वो भी हराम होगा. नीचे देखें-

अब नीचे कुछ और वजह लिखते हैं कि जिनसे मुसलमान जाकिर भाई से नफरत करते हैं-

७. जाकिर भाई मुहम्मद सल्लo के पोते इमाम हुसैन के कातिल यजीद की बड़ाई करते अक्सर सुने जाते हैं. इस वजह से शिया और सुन्नी भी उनसे नफरत करते हैं.

८. जाकिर भाई के हिसाब से किसी इस्लामी मुल्क में कोई गैर इस्लामी शख्स अपने मजहब को न तो फैला सकता है और न ही खुले तरीके से इजहार कर सकता है. वहीँ दिलचस्प बात ये है कि जाकिर भाई इस्लाम को दूसरे गैर इस्लामी मुल्कों में फैलाने की पूरी छूट मांगते हैं! उनका मन्तक है कि दीन के मामलों में मुसलमान ही सबसे ऊंचे हैं इसलिए उन्हें सब जगह छूट होनी चाहिए! मगर गैर इस्लामी मजहबों को अपने इबादतघर बनाने की भी छूट नहीं होनी चाहिए क्योंकि उनका मजहब इस्लाम के आगे छोटा है. इसको यहाँ पर देखें

इस तरह का दिमागी दीवालियापन उन पढ़े लिखे मुसलमानों को अखरता है जो पूरी दुनिया के कंधे से कन्धा मिलाकर काम करना चाहते हैं और किसी आदमी को उसके मजहब की वजह से छोटा या बड़ा नहीं समझना चाहते. यह उन अच्छे मुसलमानों की कोशिशों पर झटका है जो समझते हैं कि अच्छे काम करने वाले इंसान चाहे किसी मजहब से तालुक रखने वाले हों, वे जन्नत में ही जायेंगे.

९. आखिर में वह बात जो तकरीबन आधी मुस्लिम आबादी के जाकिर नाइक से नफरत करने की वजह है, वो है उनका औरतों के लिए रवैय्या. उनका कहना है कि औरतों को सदा हिजाब और बुरका पहनना चाहिए. जाकिर भाई एम बी बी एस के ही साथी डॉक्टर यह मानते हैं कि इस तरह के रिवाज औरतों में विटामिन डी की कमी की वजह बनते हैं. बहुत से समझदार मुसलमान बन्धु भी इस पाबंदी को इंसानियत के खिलाफ मानते हैं.

जाकिर भाई का मानना है कि औरतों को दफ्तरों में काम नहीं करना चाहिए क्योंकि वहां पर मुमकिन है कि उन्हें गैर मर्दों के साथ अकेले में मिलना पड़े. जाकिर नाइक के मुताबिक़ केवल वही मर्द किसी औरत के साथ अकेले रह सकता है जो या तो उसका शौहर हो या जिसने उसकी छाती का दूध पिया हुआ हो. जाकिर भाई की इस समझ (?) पर अमल होना भी शुरू हो गया है! अभी कुछ दिन पहले एक जानी मानी इस्लामी यूनिवर्सिटी ने फतवा दिया है कि मुस्लिम औरतों को दफ्तर के अपने मर्द साथियों को पांच बार दूध पिलाना होगा, तब जाकर वे अकेले में भी उसके साथ काम कर सकते हैं! अंदाजा लगाएं कि इस घटिया सोच पर सिर्फ औरत ही क्यों हर दिमागदार आदमी का सर भी शर्म से झुक जाता है.

जाकिर भाई की नजरों में मर्द का एक से ज्यादा बीवियां रखना जायज है लेकिन इसका उल्टा उन्हें क़ुबूल नहीं. कहते हैं कि दुनिया में औरतें मर्दों से ज्यादा हैं इसलिए ज्यादा बीवियां राखी जा सकती हैं! हमने पूरी दुनिया की आबादी बताने वाले जितने आंकड़े देखे, उनमें किसी में भी औरतों की आबादी मर्दों से ज्यादा नहीं थी. हाँ मर्दों की थोड़ी सी ज्यादा जरूर थी! पर झूठे आंकड़े देकर गलत बात को ठीक करने की धुन जाकिर भाई पर कुछ ज्यादा ही सवार है. वे यह नहीं बताते कि सब मुस्लिम मुल्कों में मर्द ही औरतों से ज्यादा हैं तो फिर वहां उलटा रिवाज क्यों न चलाया जाए?

जाकिर भाई यह यकीन करते हैं कि औरतों का दिमाग मर्दों से कमजोर होता है और इसलिए दो औरतों की गवाही एक मर्द के बराबर होती है. यही नहीं उनका मानना है कि दोजख में जलने वाले ज्यादातर औरतें ही होंगी क्योंकि वे आदमियों के दिमाग फेर देती हैं और धोखेबाज होती हैं!

जाकिर भाई का यकीन है कि अगर किसी औरत के साथ कोई दरिंदा जबरदस्ती करता है और उसकी इज्जत लूटता है तो यह साबित करने के लिए उसे कई चश्मदीद गवाह लाने होंगे जिन्होंने असलियत में …..ते हुए देखा हो.

अब कहाँ तक लिखें, जाकिर भाई को ये सब मानते और कहते शर्म नहीं आती लेकिन हमारे अन्दर उनके जैसा हौंसला नहीं. उनका हौंसला सब हदें पार कर गया है, यहाँ तक कि खुद वहाबियों ने भी अब उन्हें शैतान कहना शुरू कर दिया है. यहाँ पर देखें http://www.scribd.com/doc/21622373/Zakir-Naik-Exposed-by-Wahabis-and-salaifs-ahle-hadeth-scholars

कैसे जाकिर भाई ने मुहम्मद (सल्लo) की बेइज्जती की इसका सबूत यह है

सच्चाई की खोज के लिए जरूरी है हम झूठ को छोड़ते जाएँ. यह मुमकिन है कि इस बात पर बहस हो कि ७२ में से वो एक कौन सा फिरका है जो जन्नत में जाएगा. यह भी मुमकिन है कि इस पर बहस हो कि क्या सदा रहने वाले दोजख और जन्नत का वजूद है या नहीं और फ़रिश्ते और जिन्न हैं भी या नहीं. इस पर भी बहस हो सकती है कि क्या मुहम्मद (सल्लo) और भी कई बड़े लोगों की तरह हमें राह दिखाने वाले थे या फिर अल्लाह के पैगम्बर थे. इस पर भी बात हो सकती है कि क्या अल्लाह की भी पहली, दूसरी… और आखिरी किताब होनी चाहिए? क्या एक ही किताब पूरी नहीं? इस पर भी सवाल उठाये जा सकते हैं कि क्या वाकई कुरान आखिरी किताब है या इसमें ऐसा क्या है जो उससे पहले से मौजूद वेदों में नहीं था.

मगर एक बात तो साफ़ है जिसमें बहस की कोई गुंजाइश नहीं और वह ये कि कुछ लोग तो एकदम दोजख में फेंक दिए जाने के काबिल हैं ताकि इंसानियत तबाह न हो सके. ये कुछ लोग वो हैं जो

– ओसामा जैसे दहशतगर्दों को गलत कहना तो दूर उनसे हमदर्दी रखते हैं

– जो यह समझते हैं कि केवल उनका फिरका जन्नत में जाएगा और बाकी सब के सब दोजख की आग में जलेंगे भले ही उन्होंने कितने ही नेक काम क्यों न किये हों

– जो दूसरे मजहबों को अपने यहाँ देख भी नहीं सकते लेकिन दूसरों के यहाँ खुद का मजहब फैलाना चाहते हैं

– जो औरतों को बेवकूफ समझते हैं और उन्हें बक्से में बंद करना चाहते हैं

– जो सबूत पेश करने पर भी सच्चाई को नहीं कुबूलते

– जो किसी और के किये काम को अपना बता कर वाहवाही लूटते हैं और जिससे चोरी करते हैं उन्ही को कोसते हैं

ऐसे दहशतगर्दों के हमदर्द इंसानियत के लिए दहशतगर्दों से भी ज्यादा खतरनाक हैं. सब तरक्कीपसंद और कट्टर मुसलमानों ने भी जाकिर नाइक की कड़ी मुखालफत करके एक सही कदम उठाया है. इंसानों का सबसे बड़ा मजहब है इंसानियत और वह है- जो बर्ताव आप अपने लिए चाहते हो वह दूसरों के साथ करना. बहुत अच्छी बात है कि अधिकतर मुस्लिम भाई बहनों ने जाकिर नाइक जैसे दहशतगर्दों के खिलाफ बोलने की ताकत जुटाई. इसी तरह सच का साथ और झूठ की मुखालफत ही सच्चे तालिब ए इल्म की निशानी है.

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